Tuesday, June 30, 2015

खरीदें अपना हमशक्ल पुतला

क्या आप अपनी फोटो खिंचवाकर, अपना पोट्रेट बनवाकर और अपनी सेल्फी खींचकर थक चुके हैं। अगर हां तो अब आपके लिए बाजार में इनसे कुछ बढ़कर उपलब्ध है जिसे आप इस शादी के मौसम में अपने चाहने वालों को तोहफे के रूप में दे सकते हैं। उन्हें अब आप हुबहू अपने जैसा दिखने वाला पुतला गिफ्ट कर सकते हैं।
पेरिस में एक नया पॉप-अप शॉप खुला है जो ग्राहकों को बिलकुल उनके जैसा दिखने वाला पुतला ऑफर कर रहा है। यह विश्व में अपनी तरह की पहली दुकान है जहां 3डी प्रिंटर तकनीक के प्रयोग से आपका एक छोटा पुतला या यूं कहें कि आपका मिनी वर्जन तैयार करती है। इस पुतले का साइज आपके ओरिजनल साइज का बारहवां हिस्सा होगा।
ग्राहक अपने मनपसंद पोज में और अपने मनपसंद कपड़ों में अपना पुतला बनवा सकते हैं। इस पुतले का दाम फिलहाल 285 डॉलर यानी करीब 17,600 रुपए है। अब तक 15 लोगों ने अपना पुतला बनवाया है पर उम्मीद है कि धीरे-धीरे यह चलन जोर पकड़ेगा और सेल्फी से ऊब चुके लोग अब अलग-अलग पोज में अपना 3डी पुतला कलेक्ट किया करेंगे।

मौत की शॉपिंग

ईसाई धर्म में मौत के बाद मृत शरीर को ताबूत में रखकर दफन किया जाता है। मरने के बाद हमारा क्या होगा ये तो किसी को नही पता होता। एक न एक दिन मरना तो सभी को है तो क्यों ना इसको भी कुछ मनोरंजक बनाया जाये जिसमें हम यह सोच सके कि हम दुनिया को किस अंदाज में अलविदा करेंगे।
ये कोई कल्पना नही है बल्कि जापान की राजधानी टोक्यो में ऐसा होता है यहां शुकात्सु फेस्टा नाम का एक त्योहार मनाया जाता है। शुकात्सु का मतलब है मौत के लिए तैयार होना। यहां आने वाले लोग मरने के लिए अपनी तैयारी करके जाते हैं जिससे उनकी मौत के बाद उनके परिवार वाले उन्हें एक शानदार विदाई दे सकें।
यहां लोग अपनी पसंद की कब्र चुनते हैं। ताबूत में लेटकर अपने साइज के अनुसार ताबूत चुनते हैं। यहां तक कि ताबूत की प्री-शॉपिंग तक कर लेते हैं। उनकी शॉपिंग यहीं खत्म नही होती वह तो मरने के बाद पहने जाने वाले कपड़े तक पसंद कर खरीद लेते हैं। डे्रस के अलावा मेकअप तक चुनते हैं कि उस समय हमारे ऊपर इस डे्रस के साथ कैसा मेकअप फबेगा। वाकई अपनी मौत के लिए इतनी तैयारी करना बेहद दिलचस्प है औरअनोखा भी।

अनोखा रेस्टोरेंट: यहां वेटर का काम करते हैं बंदर

अक्सर कहा जाता है कि बंदरों का दिमाग इंसानों की तरह ही तेज होता है। समय-समय पर ऐसे घटनाएं भी होती रहती है जो इस बात की पुष्टिï भी करती हैं। इसका एक उदाहरण जापान की राजधानी टोक्यो में भी देखने को मिला। यहां स्थित काबुकी रेस्टोरेंट में वेटर का काम इंसान नही बल्कि बंदर ही करते हैं।
जी हां, शायद यह बात आपको हैरान कर दे लेकिन यह पूर्णत: सत्य है। इस रेस्टोरेंट में बंदर येट चेन और फुकु चेन, 2008 से वेटर का काम कर रहे है। जैसे ही कोई कस्टमर रेस्टोरेंट में प्रवेश करता है दोनों बन्दर अपने काम में लग जाते है। एक कस्टमर को उसकी सीट तक ले जाता है और दूसरा उसके हाथ पोंछने के लिए टॉवल लेकर आता है। उसके बाद एक बन्दर उनसे ऑर्डर लेता है और दूसरा बन्दर ऑर्डर सर्व करता है।
पहले यह बंदर रेस्टोरेंट मालिक के पालतू बंदर थे लेकिन जब बंदर येट चेन ने रेस्टोरेंट के काम में दिलचस्पी दिखानी शुरु की तो मालिक ने उसे रेस्टोरेंट का काम सिखा दिया। लेकिन दूसरे बंदर फुक चेन को ट्रेन्ड करना पड़ा।
इससे मालिक और कस्टमर दोनों ही बहुत खुश हैं। बंदर वैसा ही करता था जैसा उनका मालिक उन्हें आदेश देता है। यहां आने वाले ग्राहकों के अनुसार यह इंसानी वेटर्स कि तुलना में यह बहुत अच्छे है क्योकि इंसानी वेटर्स की तरह इनके व्यवहार को लेकर कभी भी शिकायत नही होती है। दूसरी बात यह की यह कभी भी टिप नही मांगते हैं। इसके अलावा एक मजे की बात यह है कि इन्हें वेतन में केवल सोयाबीन चिप्स देने पड़ते हैं।
2008 में जब इन्होंने काम शुरू किया था तब यह केवल ड्रेस पहनकर काम करते थे, लेकिन बाद में ये ड्रेस के साथ-साथ ह्यूमन मास्क भी पहनने लगे ताकि कस्टमर्स को ज्यादा फेमिलियर लग सके।

यहां कुत्ते से रचाया जाता है बच्चों का विवाह

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में रहने वाले आदिवासी मुंडा समाज में आज भी एक अजीबोगरीब परंपरा कायम है। यहां ग्रह-दोष मिटाने के लिए बच्चों का विवाह कुत्ते के बच्चों के साथ किया जाता है। मकर संक्रांति के करीब यहां पारंपारिक गीतों के बीच दुधमुंहे बच्चों से लेकर 5 वर्ष तक के बच्चों की शादी धूमधाम से की जाती है।
यहां बच्चों के साथ दूल्हे-दुल्हन के रूप में कुत्ते के बच्चे बैठते हैं। खुशनुमा माहौल में समाज के लोग गीतों पर थिरकते हैं। बताया जाता है कि समाज में मान्यता है कि दुधमुंहे बच्चों के ऊपरी दांत पहले निकलने पर उसे ग्रहदोष लग जाता है। बच्चों को इस ग्रहदोष से बचाने के लिए इन बच्चों की शादी कुत्ते से रचायी जाती है।

एक गैंडे की सुरक्षा में तैनात हैं 40 जवान


अभी तक आपने किसी बड़े नेता या बड़ी शख्सीयत की कड़ी सुरक्षा के इंतजाम देखे होंगे। लेकिन ऐसी ही सुरक्षा अगर किसी जानवर को भी दी जाये तो इस बारे में आप क्या कहेंगे।
हम यहां बात कर रहें हैं केन्या में रहने वाले एक सफेद गैंडे सुडान की 40 वर्षीय यह नर गैंडा अपनी प्रजाति का अंतिम नर गैंडा बचा है ऐसे में इसकी सुरक्षा के लिए वीआईपी बंदोबस्त किए गये हैं। इसकी सुरक्षा के लिए 40 हथियारबंद रेंजर तैनात किए गए हैं। जो 24 घंटे इसे सुरक्षा देते हैं।
दुनियाभर में पांच उत्तरी सफेद गैंडे बचे हैं, जिसमें से सुडान के साथ दो मादा भी केन्या में मौजूद हैं।
सुडान को पिछले साल दो मादाओं के साथ चेक गणराज्य के चिडिय़ाघर से केन्या लाया गया था। इसकी सुरक्षा के लिए प्रशासन ने इसे रेडियो ट्रांसमीटर लगाए हैं।
पजेटा संस्था सुडान की सुरक्षा के लिए धन एकत्रित करती है। उसके मुताबिक बाजार में इनके सींग की कीमत 75 हाजर डॉलर है, इसलिए शिकारियों से बचाने के लिए इसकी सींग को पहले ही काट लिया गया है। संस्था ने इनकी सुरक्षा के लिए पिछले महीने एक कैम्पेन गोफंडमी लांच किया था, जिससे 7,700 डॉलर एकत्रित हुए। जिसका उपयोग इनकी सुरक्षा में लगे रेजर्स को प्रशिक्षण देने और उन्हें हथियार मुहैया कराने के लिए किया गया।

Monday, June 29, 2015

दुनिया का सबसे बड़ा जूता

न्यूयार्क में जिल मार्टिन व केनेथ कोल को दुनिया के सबसे बड़े हाइ हील जूता बनाने के लिए गिनीज व‌र्ल्ड रिकार्ड का खिताब।

पिता की तरह दिखने के लिए बेटी ने किया कुछ ऐसा

छह साल की बच्ची एलिन स्टेनर्ड का हेयरस्टाइल इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। अपने पिता को देखकर उसे पिता की तरह दिखने की जिद हो गयी और फिर क्या था उसने अपनी जिद पूरी कर भी ली।
दरअसल यह बच्ची अपने पिता को हर माह बाल मुंडवाते हुए देखती थी। पिता को ऐसा करते देख उसकी भी इच्छा हुई कि क्यों न वह भी पिता की तरह अपने बाल मुंडवा ले। उसकी मां ने उसे बहुत समझाया लेकिन यह बच्ची नही मानी।
एलिन के अलावा दो जुडवां बच्चों की मां लुकास ने ब्लॉग पर लिखा कि एक बार तो मुझे लगा कि एलिन इस बात को कहकर भूल गई होगी, लेकिन उसने अगले दिन फिर जिद पकड़ ली। एलिन गंजी होने के लिए बहुत तत्पर थीं। एलिन कुछ भी समझने को तैयार नहीं हुई। मैंने कई बार उसे कहा कि तुम्हारे बाल बहुत खूबसूरत हैं। आखिरकार उसने बाल मुंडवा ही लिए और इस काम को अंजाम दिया उसके पापा ने। उन्होंने उसकी बॉब कट हेयरस्टाइल को पहले मोहवाक और फिर बज कट में बदल दिया। इस फैसले पर काफी ऑनलाइन प्रतिक्रियाएं भी आईं। कुछ लोगों ने इस पर नाराजगी जताई तो कई उनके समर्थन में भी आए। पेरेंटिंग एक्सपर्ट एरिका के अनुसार कुछ माता-पिता अपने बच्चों को आजादी देने से हिचकते हैं और ऐसे में आपस में बातचीत कारगर साबित हो सकती है।


यहां के लोग नही खिंचवाते फोटो

पूर्वी बोलीविया में रहने वाले मेनोनाइट्स लोग कभी फोटो नही खिंचवाते। ये लोग आधुनिक जीवन से परहेज करते हैं। इन लोगों का कहना है कि इन्हें ऐसे करने में कठिनाई होती है।
फोटोग्राफर जॉर्डी रूइज सिएरा ने पहली बार इनका फोटो क्लिक किया था। रूइज यहां 2011 में आए थे। वे यहां रुके, इन लोगों के बीच समय बिताया, विश्वास जीता, तब जाकर वह इनकी फोटो लेने में कामयाब हो पाये। रूइज इन लोगों की जीवनशैली से बहुत अधिक प्रभावित थे।
रूइज बताते हैं कि इन लोगों की फोटो लेना बेहद मुश्किल था। ये लोग कोई अनपढ़ आदिवासी लोग नही है इसलिए इनकी सोच बदला बहुत मुश्किल है। यह लोग खेतों में काम करते हैं। सरल ग्रामीण जीवन जीते हैं। ये लोग धार्मिक मान्यताओं को मानते हैं। रूइज ने इन लोगों पर एक किताब भी लिखी है।
ये लोग खूबसूरत गाउन और हैट पहनकर खेतों में काम करते हैं। महिलाएं और बच्चे कैमरे को बडे गौर से देखते हैं। लेकिन जब रूइज किसी से फोटो लेने की इजाजत मांगते तो वे लोग मना कर देते। कहते, हम कैमरे के लिए पोज नहीं कर सकते। ऐसा हमने कभी किया ही नहीं है। अगर आप चाहें तो जब हमारा ध्यान न हो, तब हमारे फोटो ले सकते हैं।

शेर या कुत्ता

अपने घर को चोरों से सुरक्षित रखने के लिए हम न जाने कौन-कौन से इंतजाम करते हैं, जैसे मजबूत लॉक, सिक्योरिटी कैमरे, हाई डेफिनेशन सेंसर और कुत्ता भी पालते हैं। लेकिन अगर बात चिडिय़ाघर की हो तो वहां तो वैसे ही काफी जानवर होते हैं।
लेकिन चीन के एक चिडिय़ाघर में इस गार्ड को पता नही क्या सूझा की उसने कुत्ते को ही शेर बना डाला। ये तस्वीर हाल ही में ट्विटर पर वायरल हुई जिसे देखकर सभी दंग रह गए। कुत्ते को शेरनी की खाल में देखकर यह कुत्ता लोगों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

यहां केवल दूसरी पत्नी से होती है संतान

आज हम आपको राजस्थान के एक ऐसे स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में सुनकर आपको जरूरी आश्चर्य होगा। यहां एक गांव ऐसा है जिसमें केवल दूसरी पत्नी के ही संतान होती है। राजस्थान के बाडमेर जिले में देरासर गांव में रहने वाले प्रत्येक परिवार में पुरुषों की एक से अधिक पत्नियां हैं। उसकी वजह यह है कि यहां पहली पत्नी से संतान नही होती और संतान पाने के लिए लोग दूसरा विवाह रचाते हैं। जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर इस बस्ती में 70 मुस्लिम परिवार रहते है। गांव में किसी भी परिवार में पहली पत्नी से किसी के भी संतान नही है, लेकिन दूसरी शादी के बाद ही सभी घरों में संतान हुई। गांव के बुजुर्ग इस संयोग को कई वाकयों से जोड़कर देखते हैं।